खुद से पूछिए एक सवाल
😌😌 मन की बात 😌😌
👉 खुद से पूछिए कि आपकी व आपके समाज की पहचान क्या है?
जय मीनेष साथियों
आज जुलाई माह का दूसरा रविवार है और रिमझिम बारिश ने इसे बहुत खुशनुमा बना दिया है। कई साथियों ने आज का दिन celebrate करने के लिए योजना बनाई होगी तो इंदौर में इस खास मौके को भुनाने के लिए शानदार पार्टी का आयोजन किया गया है। मैं भी आज के दिन को खास बनाने के लिए खुद से एक सवाल करके उसका जवाब ढूंढ रहा हूं। वो सवाल है कि मेरी पहचान क्या है और आने वाले सालों में दुनिया कि रूप में जानेगी? अंदर से जवाब मिला कि आज तुम एक journalist और Socialist के रुप में पहचाने जाते हो और भविष्य में किसी अखबार के संपादक के रूप में मेरी पहचान रहेगी। हो सकता है कि इस दौरान कुछ किताबें लिख लूं तो मुझे लेखक का नाम भी मिल जाए।
मैं इन जवाबों से थोड़ा बहुत संतुष्ट हुआ और फिर खुद से दूसरा सवाल पूछा कि मेरी पहचान तो है, लेकिन मैने जिस समाज में जन्म लिया है उसकी क्या पहचान है?
फिर अंदर से जवाब मिला कि तुम्हारी समाज कृषक समाज है।
कृषक समाज यानी हम किसान हैं। तो फिर मैंने अपने भीतर के व्यक्ति से पूछा कि बताओ यदि हम अच्छे किसान है तो कभी हमें सार्वजनिक मंच पर यह संबोधन क्यों सुनने को नहीं मिलता है। क्यों पाटीदार समाज को अच्छे किसान का दर्जा मिला है? जब सरकार पुरस्कार देती है तो क्यों किसी पंडित को उत्कृष्ट खेती करने का पुरस्कार मिल जाता है? क्यों हमारी समाज का एक भी आदमी किसानों के लिए बनाए गए समूहों में शामिल नहीं है?
यह तमाम तर्क सुनकर अंदर से आवाज आई कि हम अब उत्कृष्ट खेती कर रहे हैं और कई लोग किसान मोर्चा में नेता हैं और कई लोग किसान संघ के पदाधिकारी हैं और कई लोग हटकर खेती कर रहें हैं। तब फिर मैने दोबारा तर्क किया कि ऐसे लोग तो ऊंगलियों पर गिने जा सकते हैं और क्या इससे हमें समृद्धिशाली किसान का दर्जा मिल जाएगा?
तब फिर भीतर से आवाज आई कि हमें समृद्धिशाली किसान का दर्जा हमेशा मिला है और इसीलिए हमेशा कहा जाता है कि meena samaj एक समृद्धिशाली समाज है। इसका उदाहरण भी दिया जाता है और इसके लिए बताया जाता है हमारे लोगों द्वारा विवाह में किया जाने वाला बेपनाह खर्च और दिया जाने वाला दहेज। कोई 50 लाख की शादी करता है तो कोई 1 करोड़ रुपए खर्च करता है। यह जवाब सुनकर मैं अगला सवाल या तर्क नहीं कर पाया।
फिर मैने बात बदल दी और पूछा कि क्या हम अब व्यापारी वर्ग में भी आने लगे हैं? जवाब मिला कि इसकी क्या जरूरत है। मन ने कहा कि तुमने कई लोगों को यह कहते नहीं सुना कि हम क्या अब अपनी जमीन छोड़कर परचून की दुकान खोलेंगे और क्या कपड़े बेचेंगे। मैने फिर तर्क दिया कि इंदौर, नसरुल्लागंज, उज्जैन आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग व्यापार कर रहे हैं। मन ने फिर जवाब दिया कि यदि इस संख्या से संतुष्ट हो तो कर लिया तुमने समाज कल्याण।
इसमे मन ने मुझसे सवाल किए कि क्या भीम तुम ये बता सकते हो क्यों किसान खेती के साथ एक व्यापार अनिवार्य रुप से नहीं कर सकता? क्योंकि आरक्षण के अभाव में सरकारी नौकरी तो समाज के लोगों को मिलने से रही। क्यों समाज के युवाओं को बचपन से व्यवसाय के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता। बैठाइए उसे एक दुकान पर, फैक्ट्री में, ठेकेदार के यहां और फिर देखिए कि कैसे वो आपके रुपए का सही व्यापार में इस्तेमाल नहीं करता।
दूसरा सवाल किया कि मुट्ठीभर संख्या वाली समाज अपना दम दिखाकर पार्टियों से टिकिट ले लेती है, क्योंकि वे प्रशिक्षित होकर राजनीति करते हैं और उन स्थानों पर जाकर बैठ जाते हैं जहां से फैसले होते हैं। तो फिर क्यों इस समाज के लोग अपने-अपने बच्चों को संघ के प्रशिक्षण में नहीं भेज सकते ? वे वहां से प्रशिक्षित होकर आएं और फिर उन्हें उनकी राह चुनने दें।
जब प्रशिक्षण प्राप्त युवा आपके पास होगा तो आपको प्रतिभा की तलाश नहीं रहेगी।
मैने ये सब सवाल सुनकर निर्णय लिया और जवाब दिया कि आने वाले समय में समाज के युवाओं को जागरूक करने व प्रशिक्षित करने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा। मैंने प्रण लिया कि अब हम किसी अन्य के भरोसे नहीं बल्कि खुद संगठन के प्रशिक्षण वर्ग ज्यादा से ज्यादा आयोजित करेंगे और समाज के भविष्य का निर्माण करेंगे। हम न केवल अच्छे किसान तयार करेंगे, बल्कि अच्छे लीडर (politicians), अच्छे व्यापारी, मीडिया पर्सन यानी पत्रकार, एडवोकेट, खिलाडी, अफसर और एक अच्छा नागरिक भी तैयार करेंगे।
लेकिन अब सवाल आप युवाओं से कि क्या आप मेरा साथ दोगे? ??
आपका भीमसिंह सीहरा
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री
राष्ट्रीय मीणा समाज शक्ति संगठन
मोबाइल - 09425612356
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